Description
“भारतीय संगीत का इतिहास” (Bhartiya Sangeet Ka Itihas) उमेश जोशी द्वारा रचित एक महत्वपूर्ण कृति है, जिसमें भारतीय संगीत की उत्पत्ति और उसके ऐतिहासिक विकास का विश्लेषण किया गया है। इस पुस्तक की शुरुआत में लेखक ने संगीत की उत्पत्ति से जुड़े विभिन्न मतों और सिद्धांतों का उल्लेख किया है, जिनमें बताया गया है कि संगीत का जन्म भाषा के जन्म से भी पूर्व हुआ था। पुस्तक के तीसरे और चौथे अध्याय में भारत की प्राकृतिक अवस्था तथा प्रागैतिहासिक काल—जैसे पूर्व पाषाण, उत्तर पाषाण, ताम्र और लौह काल—में संगीत के प्रभाव पर प्रकाश डाला गया है। आगे, पाँचवाँ अध्याय सिंधु घाटी और हड़प्पा सभ्यता के संगीत का ऐतिहासिक विश्लेषण प्रस्तुत करता है। वैदिक युग में संगीत के महत्व, वैदिक मंत्रों, सामगान और नाद तत्त्वों की वैज्ञानिक व्याख्या के साथ-साथ यह प्रमाणित किया गया है कि संगीत की प्राचीन संस्कृति भारत से ही फैली। पौराणिक युग, रामायण और महाभारत काल में संगीत के स्वरूप, रचनात्मक उपयोग और प्रमुख पात्रों की भूमिका, जैसे श्रीकृष्ण का संगीताचार्य के रूप में वर्णन, बड़ी खूबसूरती से किया गया है। पुस्तक में मौर्य, शुंग, गुप्त, नाग, राजपूत, मुस्लिम, खिलजी, तुगलक, लोदी और मुगल कालों सहित मध्यकालीन युग में उत्तर भारतीय (हिंदुस्तानी) और दक्षिण भारतीय (कर्नाटिक) संगीत पर विस्तारपूर्वक विवेचन मिलता है। आधुनिक काल तक के प्रमुख संगीतज्ञों, रागों, वाद्यों, संगीतशास्त्र और संगीत के सामाजिक बदलावों का भी समावेश किया गया है। यह पुस्तक न सिर्फ ऐतिहासिक तथ्य बल्कि सांस्कृतिक, सामाजिक और संगीतशास्त्रीय दृष्टिकोण से भी भारतीय संगीत के विकास का क्रमबद्ध और विश्लेषणात्मक निरूपण करती है, जो विश्वविद्यालयों और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए विशेष रूप से उपयोगी मानी जाती है।


